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| Megasthenese in Chandragupta's Court |
सेल्युकस निकेटर अलेक्जेंडर जिसे सिकदंर भी कहते है का सेनापति व उत्तराधिकारी था। सेल्युकस निकेटर महान सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के समकालीन था।
सेल्युकस निकेटर का राजदूत मेगस्थनीज था जिसने अपनी पुस्तक इंडिका लिखी। मेगस्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में पाटलिपुत्र (पटना) आया था, उसने भारत व भारतीय समाज का विवरण अपनी पुस्तक इंडिका में लिखा है।
इंडिका में मेगस्थनीज ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात लिखी है कि भारत पर कभी किसी विदेशी ने हमला नहीं किया और न ही भारत ने कभी किसी विदेशी राष्ट्र पर हमला किया।
मेगस्थनीज के इस विवरण से चन्द्रगुप्त मौर्य के काल तक यह बात स्पष्ट हो जाती है कि चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल और शासन काल से पहले न तो भारत पर किसी विदेशी राष्ट्र ने आक्रमण किया और न ही भारत ने किसी विदेशी राष्ट्र पर आक्रमण किया।
चन्द्रगुप्त मौर्य के बाद बिन्दुसार, अशोक से लेकर अंतिम मौर्य राजा बृहदरथ मौर्य तक के शासनकाल का ऐतिहासिक विश्लेषण करने पर यही मिलता है कि भारत पर किसी विदेशी राष्ट्र ने आक्रमण किया और न ही भारत ने किसी विदेशी राष्ट्र पर आक्रमण किया, दूसरे शब्दों में भारत राजनीतिक रूप से स्थिर था।
वर्ष 1897-98 ई० के पेशावर जिले के गजेटियर के पेज संख्या - 45 पर पेशावर के इतिहास के विवरण में चन्द्रगुप्त मौर्य, अशोक का उल्लेख है और बौद्ध धर्म के विस्तार व विकास का उल्लेख है। इसी पेज पर लिखा है कि 241 ईसा पूर्व बौद्ध धर्म के प्रचारक मज्झंतिको के पेशावर भेजा गया जिन्होने कई पुजारियों को दीक्षा दी। अंतिम राजवंश को पुष्यमित्र शुंग ने उखाड फेंका जिसे ब्राह्नाण पुजारियों ने बौद्धों के नरसंहार के लिए उकसाया था। इसी समय 165 ईसा पूर्व बैक्ट्रिया के राजा मेनेंडर के नेतृत्व में ग्रीकों ने सिंधु घाटी पर हमला किया और 149 ईसा पूर्व मेनेंडर के उत्तराधिकारी एनक्रैटिडीज ने काबुल और पेशावर को अपने राज्य में मिला लिया इसके बाद शक, कुषाणों ने भारत पर आक्रमण किया।
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| Gazetteer of the PESHAWAR District 1997-98, Page No.- 45 |
ऐतिहासिक दस्तावेजों से यह पता चलता है कि पुष्यमित्र शुंग मौर्य राजा बृहदरथ मौर्य का सेनापति था जिसने बृहदरथ मौर्य की हत्या कर मौर्य वंश के शासन का अंत किया था।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि बृहदरथ मौर्य की हत्या के बाद ग्रीक, शक, कुषाण, हूणों का आक्रमण भारत पर हुआ और इस्लाम के उदय के बाद 7 वीं शताब्दी से ही भारत ने लगातार इस्लामिक आक्रमणों के झेलना शुरू किया। शक, कुषाण, हूण और इस्लामिक आक्रमणकारियों से भारतीय राजा लगातार लडते रहे और आज भारतीय सभ्यता और संस्कृति एक खंडित अवस्था मे हम सभी के सामने है।
शुंग वंश का शासनकाल अधिक समय तक नहीं रहा, लेकिन पुष्यमित्र शुंग के इस कृत्य से भारत राजनीतिक अस्थिरता के काल के गर्त में अनिश्चितकालीन रूप से चला गया जो अब तक जारी है।

