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| Source- Statistical, Descriptive And Historical Account Of The North-Werstern Provinces Of INDIA. (Image courtesy of YSCRI) |
मुख्य बातें (Highlights):
ब्रिटिश काल की पहली जनगणना (1872) के दुर्लभ ऐतिहासिक आंकड़े।
बदायूँ, फर्रूखाबाद और बरेली जनपदों में विभिन्न राजपूत शाखाओं की जनसांख्यिकी।
इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़।
विशेष लेख: भारतीय इतिहास में जनसांख्यिकी (Demography) का अध्ययन हमेशा से ही सामाजिक और राजनीतिक संरचना को समझने का एक मुख्य जरिया रहा है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1872 ई० में हुई देश की पहली आधिकारिक जनगणना एक ऐसा ही महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी। इस जनगणना ने न केवल आबादी के आंकड़े सामने रखे, बल्कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश (तब के नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज) के अलग-अलग जिलों में विभिन्न राजवंशों और कुलों की स्थिति को भी स्पष्ट किया।
आज हम इस लेख में 1872 की जनगणना के उन दुर्लभ आंकड़ों पर नज़र डालेंगे, जो हमारे तीन प्रमुख ऐतिहासिक जनपदों — बदायूँ, फर्रूखाबाद और बरेली में राजपूत (क्षत्रिय) राजवंशों की आबादी और उनकी शाखाओं को दर्शाते हैं।
1. जनपद बदायूँ: गौर और चौहान राजवंशों का दबदबा
वर्ष 1872 की जनगणना के अनुसार, बदायूँ जनपद में राजपूतों की कई शाखाएं निवास कर रही थीं, जिनमें गौर और चौहान वंश की जनसंख्या सबसे अधिक थी।
गौर: 6,976
चौहान: 6,813
बैस: 5,663
कठेरिया: 4,744
तोमर: 4,690
राठौर: 4,303
बडगूजर: 2,882
सोलंकी: 1,615
अन्य सम्मलित शाखाएं: मुख्य कुलों के अलावा सिकरवार, कठिया, गौतम, जंगोरी, पुंढीर, गहलोत, धाकरे, बच्छल, सोमवंशी, परमार, बघेल, भिटला, रघुवंशी, सावंत, भट्टी, कछवाहा, चंदेल, रैकवार, जांगरा, जादौन, गहरवार, भदौरिया और गौर कसमानी जैसी अन्य उप-शाखाओं की कुल सम्मिलित जनसंख्या 23,799 दर्ज की गई थी।
2. जनपद फर्रूखाबाद: राठौर और बैस राजवंशों की प्रधानता
गंगा के तट पर बसे ऐतिहासिक जनपद फर्रूखाबाद में राठौर और बैस राजवंशों की आबादी सबसे प्रमुख थी। 1872 के आंकड़े कुछ इस प्रकार थे:
राठौर: 8,883
बैस: 8,704
गौर: 5,982
सोमवंशी: 5,634
चौहान: 5,179
गहरवार: 4,148
परमार: 2,261
कठेरिया: 2,168
अन्य सम्मलित शाखाएं: फर्रूखाबाद में इनके अलावा भी राजपूत संस्कृति की एक बड़ी विविधता थी। यहाँ सम्मलित रूप से भल, भदौरिया, बच्छल, बघेल, चंदेल, गहलोत, कछवाहा, निकुंभ, परिहार, सेंगर, उज्जैनी, जांगडा, बडगूजर, सोलंकी, कमवार, गौतम, रघुवंशी, तमता, रैकवार, चमरगौर, गोरखिया, अजुधिवंशी, बुंदेला, भिमला, चन्द्रवंशी, सिकरवार, जैसवार, बमनगौर, बमटेला और बिसेन राजवंशों के लोग भी निवास कर रहे थे।
3. जनपद बरेली: चौहान और कठेरिया राजवंशों का गढ़
रुहेलखंड के केंद्र बरेली में चौहान और इस क्षेत्र के मूल ऐतिहासिक शासक माने जाने वाले कठेरिया राजपूतों की आबादी सबसे आगे थी।
चौहान: 9,950
कठेरिया: 8,652
जांगडा: 6,611
राठौर: 3,163
गौर: 2,730
सोमवंशी: 2,292
बैस: 1,358
गौतम: 824
अन्य सम्मलित शाखाएं: बरेली जनपद में भदौरिया, थापा, बडगूजर, बच्छल, कछवाहा, कठिया, सिकरवार, परमार, चंदेल, कश्यप, जादौन, निकुंभ, सेंगर, तोमर, सावंत, रैकवार, किनवार, रावत, गोहिल, सोलंकी, बुंदेला और गहलोत राजवंशों की कुल सम्मिलित जनसंख्या 3,542 थी।
ऐतिहासिक महत्व और निष्कर्ष
ये आंकड़े बताते हैं कि 19वीं सदी के उत्तरार्ध में रुहेलखंड और मध्य दोआब के इन तीन जिलों में राजपूतों की 30 से भी अधिक शाखाएं और उप-शाखाएं सक्रिय रूप से निवास कर रही थीं। बदायूँ में गौर, फर्रूखाबाद में राठौर और बरेली में चौहान वंश संख्या के मामले में अपनी-अपनी जगहों पर शीर्ष पर थे।
इतिहास के नजरिए से यह डेटा इस बात का गवाह है कि सदियों के उतार-चढ़ाव और राजनीतिक बदलावों के बावजूद इन क्षेत्रों में विभिन्न क्षत्रिय कुलों की सामाजिक उपस्थिति कितनी गहरी और विविधतापूर्ण रही है। आज के समय में ये आंकड़े समाजशास्त्रियों और क्षेत्रीय इतिहास के शोधकर्ताओं के लिए एक अनमोल धरोहर हैं।
Research - Yogeshwar Shri Krishna Cultural Research Institute (YSCRI)
Source- Statistical, Descriptive And Historical Account Of The North-Werstern Provinces Of INDIA.
