Wednesday, February 25, 2026

पिछले 2100 वर्षो से भारत की राजनीतिक अस्थिरता का कारण पुष्यमित्र शुंग।

Megasthenese in Chandragupta's Court



सेल्युकस निकेटर अलेक्जेंडर जिसे सिकदंर भी कहते है का सेनापति व उत्तराधिकारी था। सेल्युकस निकेटर महान सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के समकालीन था।

सेल्युकस निकेटर का राजदूत मेगस्थनीज था जिसने अपनी पुस्तक इंडिका लिखी। मेगस्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में पाटलिपुत्र (पटना) आया था, उसने भारत व भारतीय समाज का विवरण अपनी पुस्तक इंडिका में लिखा है।

इंडिका में मेगस्थनीज ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात लिखी है कि भारत पर कभी किसी विदेशी ने हमला नहीं किया और न ही भारत ने कभी किसी विदेशी राष्ट्र पर हमला किया। 

मेगस्थनीज के इस विवरण से चन्द्रगुप्त मौर्य के काल तक यह बात स्पष्ट हो जाती है कि चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल और शासन काल से पहले न तो भारत पर किसी विदेशी राष्ट्र ने आक्रमण किया और न ही भारत ने किसी विदेशी राष्ट्र पर आक्रमण किया।

चन्द्रगुप्त मौर्य के बाद बिन्दुसार, अशोक से लेकर अंतिम मौर्य राजा बृहदरथ मौर्य तक के शासनकाल का ऐतिहासिक विश्लेषण करने पर यही मिलता है कि भारत पर किसी विदेशी राष्ट्र ने आक्रमण किया और न ही भारत ने किसी विदेशी राष्ट्र पर आक्रमण किया, दूसरे शब्दों में भारत राजनीतिक रूप से स्थिर था। 

वर्ष 1897-98 ई० के पेशावर जिले के गजेटियर के पेज संख्या - 45 पर पेशावर के इतिहास के विवरण में चन्द्रगुप्त मौर्य, अशोक का उल्लेख है और बौद्ध धर्म के विस्तार व विकास का उल्लेख है। इसी पेज पर लिखा है कि 241 ईसा पूर्व बौद्ध धर्म के प्रचारक मज्झंतिको के पेशावर भेजा गया जिन्होने कई पुजारियों को दीक्षा दी। अंतिम राजवंश को पुष्यमित्र शुंग ने उखाड फेंका जिसे ब्राह्नाण पुजारियों ने बौद्धों के नरसंहार के लिए उकसाया था। इसी समय 165 ईसा पूर्व बैक्ट्रिया के राजा मेनेंडर के नेतृत्व में ग्रीकों ने सिंधु घाटी पर हमला किया और 149 ईसा पूर्व मेनेंडर के उत्तराधिकारी एनक्रैटिडीज ने काबुल और पेशावर को अपने राज्य में मिला लिया इसके बाद शक, कुषाणों ने भारत पर आक्रमण किया।

Gazetteer of the PESHAWAR District 1997-98, Page No.- 45



ऐतिहासिक दस्तावेजों से यह पता चलता है कि पुष्यमित्र शुंग मौर्य राजा बृहदरथ मौर्य का सेनापति था जिसने बृहदरथ मौर्य की हत्या कर मौर्य वंश के शासन का अंत किया था। 

ऐतिहासिक दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि बृहदरथ मौर्य की हत्या के बाद ग्रीक, शक, कुषाण, हूणों का आक्रमण भारत पर हुआ और इस्लाम के उदय के बाद 7 वीं शताब्दी से ही भारत ने लगातार इस्लामिक आक्रमणों के झेलना शुरू किया। शक, कुषाण, हूण और इस्लामिक आक्रमणकारियों से भारतीय राजा लगातार लडते रहे और आज भारतीय सभ्यता और संस्कृति एक खंडित अवस्था मे हम सभी के सामने है। 

शुंग वंश का शासनकाल अधिक समय तक नहीं रहा, लेकिन पुष्यमित्र शुंग के इस कृत्य से भारत राजनीतिक अस्थिरता के काल के गर्त में अनिश्चितकालीन रूप से चला गया जो अब तक जारी है।     


Friday, January 2, 2026

मुस्लिम अभिलेखों में आगरा की प्राचीनता और हिंदू सभ्यता का उल्लेख है।

Translation of TARIKH-E-DAUDI



सिकंदर लोदी का दरबारी इतिहासकार अब्दुल्ला अपनी पुस्तक तारीखे-दाऊदी में आगरा के बारे में लिखता है कि 


हिंदू धर्म के लोग मानते हैं कि मथुरा में शासन करने वाले राजा कंस के समय में आगरा एक शक्तिशाली शहर था। राजा कंस अपने विरोधियों को किले में कैद कर लेता था, जिसके कारण समय के साथ-साथ वह किला राज्य का एक प्रमुख कारागार बन गया था।


आज भी आगरा के गोकुलपुरा में कंस गेट है जोकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है।


अब्दुल्ला ने अपनी पुस्तक में आगरा में किले का उल्लेख किया है और वर्णन द्वापर युग का है।


जो भी कहते है कि आगरा के भवन मुगल शिल्पकला के अनुपम उदाहरण है लेकिन मुस्लिम अभिलेखों में आगरा के सम्बंध में  राजा कंस उल्लेख है और आगरा राजा कंस  का केंद्रीय कारागार था।


मुस्लिम इतिहासकार आगरा की प्राचीनता और हिन्दू सभ्यता का उल्लेख करते है आजकल के कुकुरमुत्ते आगरा को मुगल शिल्पकला का अनुपम उदाहरण बोलते है।


द्वापर युग में न बाबर का जन्म हुआ था न गौरी-खिलजी का और न उनके धर्म का।


आगरा एक प्राचीन हिन्दू नगर है।

Thursday, January 1, 2026

आगरा के अछनेरा को राजा अछल तोमर ने बसाया था।

Archaeological Survey of India, Report of A Tour in Eastern Rajputana, Year 1871-72-73 A.D.



आगरा के अछनेरा को राजा अछल तोमर ने बसाया था। आगरा की किरावली तहसील में एक शहर है अछनेरा, अछनेरा एक ब्लॉक है। अछनेरा एक ऐतिहासिक नगर है जिसका उल्लेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारी A.C.L. Carlleyele ने वर्ष 1871-72-73 ई० की अपनी रिपोर्ट Archaeological Survey of India, Report of A Tour in Eastern Rajputana में किया है। A.C.L. Carlleyle ने अपनी रिपोर्ट में अछनेरा का उल्लेख करते हुए लिखा है कि दिल्ली के राजा अनंगपाल तोमर के बेटे अछल राजा ने वर्ष 1051 ई० में अछनेरा को बसाया था। नेरे का अर्थ आश्रय होता है जिसका अपभ्रंश नेरा है। राजा अछल तोमर के नाम पर इसका नाम अछनेरा पड़ा। A.C.L. Carlleyle ने लिखा ही कि अछनेरा किला पत्थर से बना एक मध्यकालीन संरचना है जिसको Dismantled कर दिया गया है। यह किला ठाकुरों/राजपूतों का निवास स्थान था।