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| Source: Statistical, Descriptive And Historical Account of North-Western Provinces of India, Year 1876 A.D., Courtesy of YSCRI |
ऐतिहासिक अभिलेखों के झरोखे से
आज हम डिजिटल युग में जी रहे हैं, जहाँ आबादी के आँकड़े एक क्लिक पर मिल जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से लगभग 150 साल पहले हमारे समाज और क्षेत्र की जनसांख्यिकी (Demographics) कैसी थी?
वर्ष 1876 ई० में ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रकाशित स्टेटिकल गजेटियर (Statistical, Descriptive And Historical Account of North-Western Provinces of India) में एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक डेटा मिलता है। यह डेटा वर्ष 1872 ई० में हुई भारत की पहली क्रमिक जनगणना पर आधारित है, जो उत्तर प्रदेश के 'लोअर दोआब' क्षेत्र के तीन प्रमुख जनपदों—एटा, मैनपुरी और इटावा में क्षत्रिय (राजपूत) समाज की विभिन्न शाखाओं और उनकी जनसंख्या की स्थिति को दर्शाता है।
आइए देखते हैं उस दौर में इन तीनों जनपदों में किस वंश के क्षत्रियों की कितनी आबादी थी:
1. जनपद एटा: चौहान और सोलंकी राजवंशों की प्रधानता
1872 की जनगणना के अनुसार, एटा जनपद में चौहान और सोलंकी क्षत्रियों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई थी।
चौहान: 16,918
सोलंकी: 8,977
राठौर: 7,775
कटिया: 3,397
गौर: 3,162
गौरहर: 2,617
बैस: 2,259
पुंडीर: 1,890
तोमर: 1,789
बडगूजर: 1,398
जादौन: 868
गहलोत: 666
2. जनपद मैनपुरी: चौहान राजवंश का विशाल गढ़
मैनपुरी हमेशा से ही चौहान राजवंश का एक मजबूत केंद्र रहा है। 1872 के आँकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं, जहाँ चौहानों की संख्या 26 हजार से अधिक थी।
चौहान: 26,854
किरार: 7,538
बैस: 4,415
राठौर: 2,598
गहरवार: 2,469
तोमर: 2,173
धाकरे: 1,925
टांक: 1,596
भदौरिया: 1,400
1,000 से कम जनसंख्या वाले वंश:
मैनपुरी जनपद में कई अन्य क्षत्रिय शाखाएँ भी निवास कर रही थीं, जिनकी आबादी 1,000 से कम थी। इनमें प्रमुख रूप से बडगूजर, बच्छल, बघेल, बांगर, भाले सुल्तान, चंदेल, चन्द्रवंशी, दीक्षित, डोर, गहलोत, गौतम, जैसवार, जांगरा, जदुवंशी, कठेरिया, कछवाहा, निकुंभ, निर्मल, परमार, परिहार, रघुवंशी, रैकवार, राणा, सिकरवार, सूर्यवंशी, सोलंकी, सोमवंशी, सेंगर और उजम शामिल थे।
3. जनपद इटावा: सिकरवार और चौहानों का बाहुल्य
इटावा जनपद में क्षत्रिय समाज का एक बेहद विविध रूप देखने को मिलता है। यहाँ सिकरवार और चौहान राजवंशों की आबादी सबसे प्रमुख थी।
सिकरवार: 12,952
चौहान: 10,984
कछवाहा: 5,213
परिहार: 3,881
भदौरिया: 3,667
गौर: 2,766
सेंगर: 2,473
गहलोत: 1,724
बैस: 1,291
राठौर: 1,099
बमनगौर: 948
800 से कम जनसंख्या वाले वंश:
इटावा में भी एक बहुत बड़ा वर्ग उन राजपूत वंशों का था जिनकी व्यक्तिगत आबादी 800 से कम थी। इस सूची में बडगूजर, बच्छल, बुंदेला, बांगर, चंदेल, छोंकर, चमरगौर, धाकरे, दीक्षित, गहरवार, गौतम, गोलम, जैसवार, जानवर, जादौन, जसावत, किनवार, कठेरिया, किरार, काठी, कटियार, निकुंभ, उज्जैनी, परमार, पुंडीर, परवार, पच्छी, रघुवंशी, रैकवार, सोमवंशी और तोमर जैसे गौरवशाली वंश शामिल थे।
इतिहास में इस दस्तावेज़ का महत्व
ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1876 ई० में जारी किया गया यह स्टेटिकल गजेटियर (Statistical, Descriptive And Historical Account of North-Western Provinces of India) आज के समाजशास्त्रियों और इतिहासकारों के लिए एक अमूल्य धरोहर है। यह आँकड़े हमें बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के इस दोआब क्षेत्र (गंगा-यमुना के बीच का मैदान) के सामाजिक ताने-बाने को गढ़ने में क्षत्रिय समाज की विभिन्न शाखाओं का कितना बड़ा और व्यापक योगदान रहा है। 150 साल पुराने ये आँकड़े आज भी हमारे पूर्वजों की विरासत और क्षेत्रीय इतिहास को समझने का एक प्रामाणिक जरिया हैं।
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Research by - Yogeshwar Shri Krishna Cultural Research Institute (YSCRI)
Soruce - Statistical, Descriptive And Historical Account of North-Western Provinces of India, Year 1876 A.D.
