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| Archaeological Survey of India, Four Report Made During The Year 1862-63-64-65, Vol 1 |
राजा वीरदेव सिंह बुंदेला ने 5 माघ सुदी वर्ष 1618 ई० में मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मस्थान मन्दिर का निर्माण करवाना शुरू किया। अन्य ऐतिहासिक श्रोतों से पता चलता है कि 5 माघ सुदी वर्ष 1618 ई० को राजा वीरदेव सिंह बुंदेला ने 52 निर्माण एक साथ शुरू करवाये थे जिसमें बरसाना का राधा रानी मन्दिर भी है। यह 52 निर्माण अकाल राहत परियोजना के अंतर्गत आरंभ करवाये थे।
फ्रेंच व्यापारी व यात्री जीन बैप्टिस्ट टेवरनियर ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान मन्दिर को देखा व उसका वर्णन किया वर्ष 1669-70 ई० को औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर पर कब्जा कर मन्दिर के भवन को मस्जिद में बदल दिया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर अर्थात कटरा केशव देव पर उत्खनन किया व अपनी रिपोर्ट Archaeological Survey of India, Four Report Made During The Year 1862-63-64-65, Vol 1 में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर का विवरण दिया है।
अपनी रिपोर्ट की प्लेट संख्या XXXIX पर कनिंघम ने मथुरा शहर व श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर का नक्शा दिया है।
यह नक्शा अष्टभुजीय है व PLAN OF THE KATERA showing the foundation of the TEMPLE OF KESAVA RAI behind the Jama Masjid नाम से दिया है।
जीन वैप्टिस्ट टेवरनियर ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर को जमीन से 20-25 फुट ऊँचे अष्टभुजीय प्लेटफॉर्म पर लाल पत्थर से बना बताया है जिसके ऊपर तीन गुम्बद है बीच वाला बड़ा व बगल के दोनों अपेक्षाकृत छोटे है।
वर्तमान में शाही मस्जिद ईदगाह के भवन को देखें तो वह जमीन से 20-25 फुट ऊँचे प्लेटफॉर्म पर खड़ा है व लाल पत्थर का बना है जिसके ऊपर तीन गुम्बद है जिसमें बीच वाला बड़ा व अगल बगल के दोनों छोटे है जिनपर कमल की आकृति बनी है।
अपनी रिपोर्ट में अलेक्जेंडर कनिंघम ने कटरा केशव देव इस प्लेटफार्म की लंबाई 804 फ़ीट व चौड़ाई 653 फ़ीट लिखी है यदि इस लंबाई व चौड़ाई का एकड़ में क्षेत्रफल निकाला जाए तो यह करीब 12 एकड़ आता है। कनिंघम ने भी इसे कटरा केशव देव कहा है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर अर्थात कटरा केशवदेव जिसके भवन को आजकल शाही मस्जिद ईदगाह भी कहते है वर्ष 1920 ई० से वर्तमान समय तक पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के अधीन एक संरक्षित स्मारक है।
ASI के अभिलेखों में यह The portions of Katra mound which are not in the position of nuzul tenants, on which formerly stood a temple of Keshavadeva which was dismantled and the site utilized for the mosque of aurangzeb.
नाम से रिकॉर्ड है।
टेवरनियर के विवरण, ASI के विवरण व शाही मस्जिद ईदगाह के भवन को देखकर विश्लेषण करने पर यह बात समझ आ जाती है कि वर्तमान शाही मस्जिद ईदगाह का भवन ही राजा वीरदेव सिंह बुंदेला द्वारा बनवाया गया श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर का भवन है जो अपनी DISMANTLE अवस्था में खड़ा है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर का यह भवन आस्था के साथ-साथ एक सांस्कृतिक महत्व का भी है जिससे भारतीय शिल्पकला के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
वर्तमान में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के 18 केस माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष विचारधीन है।

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