Thursday, April 30, 2026

हसन खान मेवाती के बारे में बाबर का उल्लेख।

(Source- The Baburnama in English, Translated by A.S. Beveridge)




बाबरनामा के पेज संख्या- 545 पर बाबर ने लिखा है कि इब्राहीम के साथ लड़ाई में हसन खान मेवाती का बेटा नाहर खान हमारे हाथ लग गया था; हमने उसे बंधक बना लिया था और दिखावे के तौर पर उसी के कारण उसका पिता (हसन खान मेवाती) लगातार हमारे पास आता-जाता रहता था और उसे बुलाता रहता था। अब कई लोगों को लगा कि अगर हसन खान को उसके बेटे को भेजकर मना लिया जाए, तो वह ज़्यादा नरम दिल हो जाएगा और मुझसे मिलने के लिए उसका आना-जाना आसान हो जाएगा। इसलिए नाहर खान को सम्मान का वस्त्र पहनाया गया; उसके पिता के लिए उससे वादे किए गए और उसे जाने की इजाज़त दे दी गई। वह पाखंडी [हसन खान] ज़रूर अपने बेटे को मुझसे जाने की इजाज़त मिलने का इंतज़ार कर रहा था, क्योंकि यह सुनकर और जब उसका बेटा अभी तक उससे नहीं मिला था, वह अलवर से निकलकर तुरंत आगरा ज़िले के तोडा भीम में राणा सांगा से जा मिला। उस समय उसके बेटे को जाने देना एक गलत निर्णय रहा।


बाबर के इस उल्लेख से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि हसन खान मेवाती इब्राहीम लोदी के साथ पानीपत की लड़ाई में बाबर के विरुद्ध लड़े जिसकारण हसन खान मेवाती के बेटे हसन खान को बाबर ने युद्ध बंधक बना लिया, इब्राहीम के बाद उन्होंने राणा सांगा के साथ बाबर के विरुद्ध युद्ध करना जारी रखा।


बाबर के इस उल्लेख से बाबर के विरुद्ध हसन खान मेवाती द्वारा राणा सांगा की सेना से मिलना एक राजनीतिक कारण को दर्शाता है।


एक साधारण सी बात है दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है यहाँ पर राणा सांगा और अफगानों दोनों का दुश्मन एक था बाबर।


आजकल के इतिहासकार राणा सांगा की छवि नकारात्मक और हसन खान मेवाती की छवि एक राष्ट्रवादी के रूप में दिखाते है लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक राजनीतिक मजबूरी थी क्योंकि हसन खान मेवाती इब्राहीम लोदी के साथ थे और इब्राहीम लोदी को राणा सांगा पहले ही खतौली के युद्ध में हरा चुके थे।



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