Monday, May 18, 2026

सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने युद्धक्षेत्र में वीरगति प्राप्त की थी।

History of India by M. Elphinstone


 वर्ष 1843 ई० में प्रकाशित अंग्रेज अधिकारी माउंटस्टुअर्ट एलफिंस्टन ने अपनी पुस्तक हिस्ट्री ऑफ इंडिया में सम्राट पृथ्वीराज चौहान व मोहम्मद गौरी के तराइन के दूसरे युद्ध के बारे में लिखा है।


सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को आगे न बढ़ने के लिए संदेश भेजा जिस गौरी के जनरल ने आदेश के लिए समय मांगा।



सम्राट पृथ्वीराज चौहान व मोहम्मद गौरी की सेनाओं के कैम्प पास-पास थे बीच में एक नाला था।


मोहम्मद गौरी ने भोर होते ही बीच के नाले को पार कर सम्राट पृथ्वीराज चौहान की सेना के कैम्प पर हमला कर दिया जिससे अफरा-तफरी मच गई। 


अपनी योजना में विफल होने के बाद गौरी भागने लगा जिसका पीछा सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने किया।


 सेना से दूर होते ही गौरी के पहले से तैयार 12000 सैनिकों ने महाराज पृथ्वीराज चौहान और उनके सरदारों को घेर लिया, महाराज पृथ्वीराज चौहान और उनके सरदारों को युद्ध क्षेत्र में ही मार दिया।


सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने युद्ध क्षेत्र में ही वीरगति प्राप्त की थी उन्हें न तो गजनी ले जाया गया और न ही उन्हें अंधा किया गया।


1206 ई० में खोखर राजपूतों ने गौरी की हत्या कर दी।


जिस समय गौरी ने हमला किया वह युद्ध विराम का समय था, गौरी यह जानता था कि वो कभी नियमों से युद्ध नहीं जीत सकता।


इतिहास में सच लिखा है लेकिन क्षत्रियों को अपमानित करने के लिए झूठ प्रचारित किया जाता है।

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