Thursday, May 28, 2026

Jihad Or Holy War : A necessary concept to be understood by every Indian.

HISTORY OF THE MUSLIM WORLD

 

भारत में जब हम पश्चिमी तरफ के मुस्लिम आक्रमणों के इतिहाकर को पढ़ते है तो अक्सर भारतीय राजाओं के विरूद्ध  जिहाद और Holy War जैसे शब्द मिलते है। जिहाद और Holy War का उल्लेख महमूद गजनवी से लेकर बाबर तक के विवरण में मिलता है।


वर्ष 1930 ई० में Khan Bahadur Ahsanullah द्वारा लिखित पुस्तक HISTORY OF THE MUSLIM WORLD में Jihad Or Holy War का उल्लेख है।


खान बहादुर साहब Jihad Or Holy War के उल्लेख में लिखते है कि जीते हुए इलाकों के लोगों को हमेशा सबसे पहले खलीफ़ा इस्लाम कबूल करने के लिए कहता था। अगर वे एतराज़ करते तो उन्हें खलीफ़ा की हुकूमत माननी पड़ती और अपनी बात मानने के लिए जजिया या कैपिटेशन-टैक्स देना पड़ता था। लेकिन जजिया देने से मना करने पर किसी की जान या माल की ज़ब्ती नहीं होती थी। जिहाद या पवित्र युद्ध उन लोगों के खिलाफ़ घोषित किया जाता था जो इस्लाम कबूल करने से मना करते थे और लड़ाई की पेशकश करते थे। जीते हुए लोगों से लूटे गए माल का, पाँच में से चार हिस्सा जीतने वाली सेना का होता था। जो लोग इस्लाम कबूल कर लेते थे, वे इस्लामी समुदाय में शामिल हो जाते थे और उसके खास अधिकार पाने के हकदार होते थे।


भारत के हिन्दू राजाओं के विरुद्ध अनेक मुस्लिम इतिहासकारों ने आक्रमणकारियों के ऐतिहासिक वृतांतों में जिहाद या पवित्र युद्ध का उल्लेख किया है।


इन युद्धों के बाद मंदिरों को तोड़ने, हिन्दू नरसंहार,जजिया, धर्मांतरण जैसी घटनाओं का उल्लेख मिलता है।


भारतीयों को इतिहास में घटी घटनाओं की सही जानकारी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इतिहास को ध्यान में रखकर सही निर्णय ले सकें और भारत की एकता व अखंडता चिरकाल तक सुनिश्चित की जा सकें।


वर्ष 1947 ई० का भारत विभाजन हर भारतीय के सीने पर एक घाव है।

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